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Tuesday, January 8, 2019

जूते और पैर

जूते और पैर

"माँ ....मैं ये जूते नहीं पहनूँगा। मुझे वुडलैंड के ही जूते चाहिए।" महंगे जूते की जिद्द में तमतमाते हुए अभिषेक ने बोला।
"जूते की अहमियत पैर को सुरक्षा प्रदान करना है बेटा"। माँ ने समझाने की कोशिश की।
"मैं कुछ नहीं जानता। मुझे चाहिए तो चाहिए।"गुस्से में अभिषेक तेजी से बाहर निकल गया।
"रुक जाओ बेटा......रुक जा...." माँ ने अभिषेक को रोकने की असफल प्रयास की।
अभिषेक गुस्से में बाज़ार की तरफ बढने लगा।
"भगवान् के नाम पर कुछ दे दे बाबु।" की आवाज़ के साथ ही अभिषेक अचानक रुक कर भिखारी की ओर देखा। भिखारी के दोनों पैर कटे हुए देखकर एक ही क्षण में जूते और पैर की अहमियत समझ में आ गई। पश्चाताप करते हुए अभिषेक घर की तरफ मुड़ गया।

मौलिक एवं अप्रकाशित
राजीव नयन कुमार
शिक्षक एवं रंगकर्मी
ओबरा औरंगाबाद


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