लघुकथा : विडंबना
गांव का मंदिर..... मंदिर के प्रांगण में वो बूढ़ा पीपल का पेड़....... पेड़ के नीचे ताश खेलते लोग आपस में बातें कर रहे थे। ये वही लोग थे, जो कुछ दिन पहले लॉक डाउन में विभिन्न प्रदेशों से अपने गांव में वापस लौटे थे। गांव में काम के अभाव में, वे अभी भी बेरोजगार थे। कुछ को मनरेगा में काम मिला, तो कुछ को खेतों में। लेकिन अधिकतर के पेट में अभी भी आग लगी हुई थी। अब कोरोना पर पेट की भूख का भारी पड़ना स्वाभाविक ही था। ताश की पत्तियों को फेंटते हुए चनेसर ने बोला,
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" कल जो कंपनी की बस आ रही है, उस बारे में तुम्हारा क्या विचार है माधो।"
" मैं तो किसी भी हाल में जाऊंगा चनेसर। अब पेट की भूख बरदाश्त नहीं होती। वैसे भी कंपनी तीन महीने का एडवांस दे रही है।"
" जाने का विचार तो मैं भी कर रहा हूं माधो। " चनेसर बुझे मन से कुछ सोचते हुए बोला।
महानगर से लौटते समय चनेसर ने कसम खाई थी, कि अब महानगर कभी वापस नहीं जाएगा। पैर के छाले कुछ दिन तक टीस बनकर याद भी दिलाता रहा। सोचा था, गांव में ही मेहनत मजूरी करूंगा। परंतु पेट की आग रूपी भट्ठी में सारे विचार जलकर खाक हो गए। अब तो कंपनी वाले सैलरी भी बढ़ाकर दे रहे हैं। ए सी गाड़ी की व्यवस्था अलग से।
"ठीक है माधो, मैं भी तुम्हारे साथ महानगर चलूंगा। अरे भाई ! यहां भी मरना और वहां भी मरना।"
इस बार ताश की पत्तियों को मिलाते हुए चनेसर ने धीरे से निर्णयात्मक भाव में बोला।
"ठीक है तो कल सुबह तैयार होकर इसी पेड़ के पास चले आना चनेसर।" ताश के पत्तियों को समेटते हुए माधव खड़ा हो गया।
चनेसर और माधव अपने सामान के साथ मंदिर वाले पीपल के पेड़ के पास सुबह - सुबह पहुंच गए। कंपनी की ए सी गाड़ी पहले से ही लगी हुई थी। जोगपट्टी के पदारथ, भटोपुर के परीखन, लेमुआ के शिवशंकर, पंडित टोला के जीतन मिश्र आदि पूर्व से ही बस में अपनी जगह लेकर बैठे हुए थे। चनेसर और माधव भी बस में बैठ गए। कंपनी के तरफ से तीन महीने के एडवांस में जो भी मिला, उसे परिवार को सुपुर्दकर चनेसर और माधव संघर्ष के सफर में निकल गए। भूख और कोरोना ने ज़िन्दगी को अजीब विडंबना में डाल दिया था। अंततः कोरोना और भूख में, जीत भूख की ही हुई। गाड़ी जैसे जैसे आगे बढ़ रही थी , वैसे वैसे गांव और वहां की स्मृतियां पुनः विस्मृत होते जा रहा था। सिर्फ दिखाई दे रहा था तो बस का धुआं।
मौलिक एवं अप्रकाशित
राजीव नयन कुमार (शिक्षक)
मध्य विद्यालय खरांटी, ओबरा, औरंगाबाद
दूरभाष 9835435502
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