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Wednesday, July 17, 2019

बदलती तस्वीर

बदलती तस्वीर
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विद्यालय में छुट्टी की घंटी बजी,
सुन रहा था खड़ा सड़क के इस पार।
कुछ ही क्षणों में निकला
भविष्य की एक लम्बी कतार।
आँखों में सपना लिए,
मिला रहे कदम ताल।
छोटे बड़े ,ऊँचे नीचे,
सब चल रहे एक चाल।
क्षण भर के लिए
खो गया सपनो में।
संसार सिमट गया
अपनों में।
मेरा भारत अग्रसर है
विकास पथ पर।
महान भारत चल रहा
समानता की रथ पर।
तभी निरीह बच्चे की आवाज़,
टकराई अपने ही कानो से।
स्वपनिल मस्तिष्क पटल,
झंकृत हो उठा इन आवाजो से।
सपनों से सच्चाई में आया,
एक नया भविष्य,
सामने खड़ा पाया।
हाँथ में कटोरा,
अंग वस्त्र विहीन।
होठ सुखकर रेगिस्तान बना,
चेहरा रंगहीन।
चारो तरफ मानो,
बंज़र ही बंज़र हो गया।
इस तस्वीर को देखकर,
एकदम से डर गया।
जेब से एक सिक्का निकला,
बेमन से कटोरे में डाला।
इस तस्वीर को,
चौराहे पर छोड़ गया।
कर्त्तव्य बोध ग्रस्त आगे बढ गया।
मौलिक रचना
राजीव नयन कुमार