अफ़सोस
"मैं अन्दर आ सकती हूँ सर।"
"कौन ? प्रिया तुम।फिर से लेट।विद्यालय समय से आया करो।समझाते हुए मास्टर जी ने वर्ग कक्ष में प्रवेश की अनुमति दी परन्तु बैठने की नहीं। देर से आने का कारण बताओ ।" मास्टर जी ने सख्त शब्दों में कहा।
प्रिया निरुतर चुपचाप खड़ी रही ।
"सर जी......। सर......जी।"
अगले बेंच पर बैठी अंजली कुछ समझाने की कोशिश की।
"हाँ हाँ बोलो अंजली।"
"सर जी प्रिया खाना बनाकर आती है और......"
"और क्या अंजली......?"
"इसकी मम्मी नहीं है सर जी.....।"
क्या....????? मास्टर जी बिल्कुल आवाक रह गए।
मास्टर जी अफ़सोस भरी एक लम्बी साँस लेते हुए प्रिया को बैठने के लिए कहा।
स्वरचित
मौलिक एवं अप्रकाशित
राजीव नयन कुमार
ओबरा, औरंगाबाद (बिहार)
दूरभाष 9835435502
नीरज
ReplyDeleteGood
ReplyDeleteGood
ReplyDeleteGood
ReplyDelete